लापरवाही : ग्रेसिम केमिकल डिविजन फैक्ट्री में कार्य के दौरान गंभीर रूप से घायल हुआ ठेका श्रमिक, हाथ की उॅगलियां कट कर अलग हुई।



नागदा

ग्रेसिम केमिकल डिविजन में काराखाना प्रबंधकों की गंभीर लापरवाही सामने आयी है। अधिकारीयों की लापरवाही के चलते एक युवा श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया। श्रमिक को उपचार के लिए इंदौर के चैईथराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

बता दें कि स्थानीय अद्योगों में श्रमिकों के गंभीर रूप से घायल होने के हादसे आम हो गये हैं क्योंकि उद्योग प्रबंधकों ने मालिक की तिजौरी भरने के लिए कारखाने की बडी बडी मशीनें ठेका श्रमिकों के हवाले कर दी हैं। जिन मशीनों पर अनुभवी लेबर कार्य किया करती थी उन्हें अब अनुभवहीन श्रमिक चला रहे हैं नतीजतन यह अनुभवहीन श्रमिक गंभीर हादसों का शिकार हो रहे हैं। 

अधिकारीयों कि लापरवाही, हादसे में श्रमिक के हाथ की 4 उॅगलियाॅ कटी

उद्योग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सुबह सीएसएफ प्लांट के तीसरे फेस पर ठेका श्रमिक भीमसेन यादव काम कर रहा था जिस मशीन पर वह काम कर रहा था उस मशीन को अनुभवी फिटर द्वारा चलाया जाता है। मगर उद्योग के अधिकारीयों द्वारा फिटर कि गैरमौजूदगी में अनुभवहीन ठेका श्रमिक भीमसेन से काम लिया जा रहा था उक्त मशीन पर काम का अनुभव न होने के वजह से श्रमिक का हाथ मशीन में आ गया और उसके हाथ की चार उॅगलियां कट कर मशीन में ही गिर गयी। उद्योग के जानकार बताते हैं कि इस हादसे में मेकेनिकल और प्रोसेस विभाग के अधिकारीयों कि गंभीर लापरवाही सामने आ रही है क्योंकि जब एक अनुभवहीन श्रमिक से काम लिया जा रहा था तब उक्त विभाग के किसी बडे अधिकारी को वहां मौजूद रहना था लेकिन श्रमिक भीमसेन अकेला ही काम कर रहा था और हादसे का शिकार हो गया।

4 से 5 श्रमिक का काम अकेला घायल श्रमिक कर रहा था

मिली जानकारी के अनुसार घायल श्रमिक के पास ना तो सेफ्टी परमिट था ना ही जाॅब आॅर्डर इतना ही नहीं जिस मशीन पर वह अकेला कार्य कर रहा था वहां 4 से 5 श्रमिकों को काम करना होता है लेकिन उद्योग के अधिकारीयों द्वारा अकेले भीमसेन से ही काम लिया जा रहा था।

नौकरी की मजबूरी में करना होता है काम

उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों का हाल इन दिनों ऐसा है कि उन्हें मजबूरी में हर वो काम करना होता है जिसका उन्हें अनुभव हो या ना हो यदि कोई श्रमिक थोडा भी काम करने से इंकार करता है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है ऐसे में अपने परीवार के पालन पोषण के लिए ठेका श्रमिक उद्योग के हर खतरे को उठा कर काम करने को मजबूर हैं।