विधायक रघुवंशी बोले प्रदेश के 26 जिलों में 10 लाख रघुवंशी, मैं सभी को एक माला में पिरोने निकला हूँ।


विधायक रघुवंशी बोले प्रदेश के 26 जिलों में 10 लाख रघुवंशी, मैं सभी को एक माला में पिरोने निकला हूँ।



नागदा जं.
अखिल भारतीय रघुवंशी क्षत्रिय महासभा के प्रदेशाध्यक्ष व मप्र के कोलारस से विधायक विरेन्द्र सिंह रघुवंशी ने अपने प्रदेश दोरे के दौरान आज नगर आगमन पर रघुवंशी समाज की धर्मशाला में समाजजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर को लेकर दिए फैसले ने कहीं न कहीं रघुवंशी समाज को एक होने का अवसर दिया है, और में प्रदेश के समाजजनों को एक माला में पिरोने के लिए निकला हूँ । प्रदेशाध्यक्ष रघुवंशी ने अपने उदबोधन में समाज में एक जुटता लाने समाज की उन्नति , विकास ओर शिक्षा पर जोर देते हुए ।समाज मे व्याप्त कुरूतियो को खत्म करने की  बात भी समाज जनो से कही प्रदेशाध्यक्ष नेकहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई के दौरान माननीय जज महोदय ने राम के वंशज को लेकर सवाल किया था उसी के बाद सारे प्रदेश से हजारो की सँख्या में रघुवंशीयो ने अयोध्या जाकर श्री राम के वंशज होने का प्रमाण दिया।
तभी से मेरे मन मे आया कि अब प्रदेश के सभी राम के वंशजो को एक सूत्र में पिरोने का कार्य  दिन-रात करूँगा । अभी प्रदेश के 26जिलों में करीब 10 लाख  रघुवंशी निवासरत है । आगामी मार्च में भोपाल में रघुवंशी समाज का सम्मेलन आयोजन होगा जिसमें आगे की रूप रेखा तय की जायेगी ।



समानान्तर संगठन खड़ा कर व्यक्तिगत लाभ के लिए अखंड समाज को खंडित कर रहे हैं कुछ लोग



समाज मे एक ओर अखण्ड रघुवंशी समाज परिषद नाम के समान्तर संगठन कुछ लोगों ने खड़ा किया है   व अपने करीबीयों को सोशल मीडिया के माध्यम से ही पद बाँटकर व्यक्तिगत लाभ के लिए अखंड रघुवंशी समाज को खण्ड खण्ड करने का कार्य किया जा रहा है। उक्त संगठन की गतिविधियों को लेकर प्रदेशाध्यक्ष विरेन्द्र सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि  समाज को इस तरह निजी स्वार्थ के लिए न बांटकर एक जाजम पर बैठ पुराने संगठन  को ही मजबूती देकर समाज हित मे कार्य करने का आह्वान किया।



उपनाम के साथ रघुवंशी लिखें, गोत्र नहीं




इसी के साथ प्रदेशाध्यक्ष विधायक विरेन्द्र सिंह ने पूरे प्रदेश के सभी समाजजनों से यह निवेदन भी किया कि सभी रघुवंशी भाई अपने उप नाम में गोत्र न लिख कर रघुवंशी ही लिखें कई जगहों पर आज भी रघुवंशी समाज के लोग उपनाम में अपनी गोत्र लिखते हैं, जिससे उन्हें पहचानने में दिक्कतों का सामना करना होता है। उपनाम में रघुवंशी लिखने के पीछे एक तर्क यह भी दिया कि कई अन्य जाती के लोग भी रघुवंशी उपनाम का उपयोग करने लगे हैं जिससे असली ओर नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।



अपने समाज के प्रदेशाध्यक्ष का स्वागत समाज की धर्मशाला में किया गया जिसमें अभिभाषक केशव रघुवंशी, वरिष्ठ समाजजन सुरेश रघुवंशी ,अनिल रघुवंशी ,बसन्त रघुवंशी ,विजय रघुवंशी , वीरेंद्र रघुवंशी ,सुनील रघुवंशी ,गोविंद रघुवंशी ,मुनेश रघुवंशी , वीरू रघुवंशी सहीत बड़ी सँख्या में रघुवंशी समाजजन उपस्थित थे।